कवर्धा न्यूज़ - धान के सही दाम और समय पर भुगतान से खुश हुए बबूलूराम : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में किसानों को मिला भरोसा, धान खरीदी प्रक्रिया हुई आसान
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta / Wed, Jan 14, 2026 / Post views : 266
धान के सही दाम और समय पर भुगतान से खुश हुए बबूलूराम
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में किसानों को मिला भरोसा, धान खरीदी प्रक्रिया हुई आसान
कवर्धा 14 जनवरी 2026। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिले में धान खरीदी का काम सरल और व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। धान खरीदी केंद्रों में किसानों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। केंद्रों में तौल, बारदाना, टोकन, छांव और पीने के पानी जैसी जरूरी व्यवस्थाएँ पहले से मौजूद हैं, जिससे किसान आराम से अपना धान बेच पा रहे हैं।
धान खरीदी के साथ-साथ धान उठाव का काम भी लगातार हो रहा है। इससे केंद्रों में भीड़ नहीं लग रही और व्यवस्था बनी हुई है। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। सही और समय पर मूल्य मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। अब खेती केवल गुजारे का साधन नहीं रह गई है, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने का जरिया बन रही है।
साय सरकार की इस किसान हितैषी व्यवस्था से किसानों में खेती के प्रति नया उत्साह देखने को मिल रहा है। सरल प्रक्रिया और समय पर भुगतान से किसानों का भरोसा शासन पर और ज्यादा बढ़ा है। कबीरधाम जिले के ग्राम जुनवानी के किसान श्री बबूलूराम यादव ने बताया कि उन्होंने इस साल 35 क्विंटल 60 किलो धान बेचा है। उन्होंने कहा कि अब धान बेचने में ज्यादा समय नहीं लगता। पहले पूरे दिन केंद्र में बैठना पड़ता था, लेकिन अब सभी काम समय पर और आसानी से हो जाते हैं।
श्री यादव ने बताया कि ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से टोकन लेने की सुविधा है, जिससे प्रक्रिया और आसान हो गई है। बारदाना समय पर मिल जाता है और तौल भी सही तरीके से होती है। धान बेचने के बाद राशि सीधे खाते में आ जाती है, जिससे किसी तरह की चिंता नहीं रहती। श्री यादव ने यह भी बताया कि इस बार खाद समय पर और पर्याप्त मात्रा में मिली, जिससे फसल अच्छी हुई है। उत्पादन बढ़ने से आमदनी भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब खेती करने में पहले जैसी दिक्कतें नहीं आतीं और किसान मन लगाकर खेती कर पा रहे हैं।
Chief Editor - Digvendra Kumar Gupta
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