मुंगेली न्यूज़- धान परिवहन करने वाले 09 वाहनों को किया गया जब्त : ओवरलोडिंग व धान रिसायक्लिंग में गंभीर उपलेटा राईस मिल को किया गया सील
Thu, May 14, 2026
जिला जनसंपर्क कार्यालय मुंगेली (छ.ग.)
समाचार
ओवरलोडिंग व धान रिसायक्लिंग में गंभीर उपलेटा राईस मिल को किया गया सील
अनियमितता पर कलेक्टर-एसपी ने उपलेटा व वर्धमान राईस मिल का सघन निरीक्षण
धान परिवहन करने वाले 09 वाहनों को किया गया जब्त
मुंगेली, 12 जनवरी 2026//
जिले में धान के अवैध ओवरलोडिंग और रिसायक्लिंग की शिकायतों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। राज्य शासन से प्राप्त अलर्ट तथा मुख्य सचिव की बैठक के उपरांत कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार एवं पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल ने उपलेटा व वर्धमान राइस मिल सहित उपार्जन केन्द्र नवागॉव घुठेरा का सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं और गड़बड़ियां सामने आने पर उपलेटा राइस मिल को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया। वहीं धान परिवहन एवं ओवरलोडिंग में संलिप्त 09 वाहनों को जब्त किया गया है। साथ ही वर्धमान राईस मिल की जांच जारी है। इसी तरह उपार्जन केन्द्र नवागॉव घुठेरा में बिना जीपीएस वाले वाहन के माध्यम से धान के उठाव की जानकारी पर जांच किया जा रहा है।
कलेक्टर ने बताया कि जिले की राइस मिलों और सहकारी समितियों में धान की ओवरलोडिंग और रिसायक्लिंग से संबंधित लगातार शिकायतें एवं रिपोर्ट प्राप्त हो रही थीं। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर उपलेटा की 04 राइस मिलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं। निरीक्षण के दौरान राइस मिल के पीछे की बाउंड्रीवाल टूटी हुई पाई गई, जिससे बाहरी धान को अवैध रूप से खपाने की आशंका जताई जा रही है। कलेक्टर ने बताया कि कस्टम मिलिंग के नाम पर प्राइवेट मिलिंग की जा रही थी। इसके अलावा विभिन्न फर्मों के बीच किसी प्रकार का अधिकृत एंट्री-एग्जिट गेट नहीं था, जिससे एक फर्म का चावल दूसरी फर्म में अवैध रूप से खपाया जा रहा था।
कलेक्टर ने बताया कि राज्य से प्राप्त अलर्ट में जिस वाहन में धान के मूवमेंट की जानकारी मिली थी, वही वाहन राइस मिल परिसर में पाया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में ओवरलोडिंग, अवैध परिवहन एवं धान रिसायक्लिंग से जुड़ा सुनियोजित नेटवर्क होने की संभावना भी सामने आई है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित राइस मिल संचालकों, फर्मों एवं संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री प्रभाकर पाण्डेय, अपर कलेक्टर श्री जी. एल.यादव, जिला खाद्य अधिकारी श्री हुलेश डड़सेना, सहकारिता आयुक्त श्री हितेश श्रीवास, डीएम नान श्री संदीप शर्मा, जिला विपणन अधिकारी श्री मनोज यादव, जिला परिवहन अधिकारी श्री असीम माथुर सहित राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
क्रमांक//01-52 सुजीत कुमार सिंह गौरव साव फोटो
कवर्धा -90 साल पुरानी सरोधा बांध की मुख्य नहर पर संकट अवैध मुरुम खनन औ : अवैध मुरुम खनन और हैवी ट्रकों के दबाव से पड़ी दरारें, 9 हजार से अधिक किसानों की सिंचाई व्यवस्था खतरे में
Thu, May 14, 2026
90 साल पुरानी सरोधा बांध की मुख्य नहर पर संकट
अवैध मुरुम खनन और हैवी ट्रकों के दबाव से पड़ी दरारें, 9 हजार से अधिक किसानों की सिंचाई व्यवस्था खतरे में
दिगवेन्द्र गुप्ता की रिपोर्ट
कवर्धा। जिले के 9 हजार से अधिक किसानों की जीवनरेखा मानी जाने वाली सरोधा बांध की मुख्य नहर इन दिनों गंभीर खतरे का सामना कर रही है। ग्राम तारो और भागूटोला में निजी भूमि पर हो रहे अवैध मुरुम खनन के चलते नहर की संरचना कमजोर होती जा रही है। नहर पार मार्ग से प्रतिदिन 50 से अधिक भारी ट्रकों का आवागमन हो रहा है, जबकि इस मार्ग पर भारी वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध है।
लगातार दबाव के कारण लगभग दो किलोमीटर के दायरे में छह से अधिक स्थानों पर बड़ी दरारें उभर आई हैं। यदि समय रहते मरम्मत और रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो आगामी खरीफ सीजन में 7 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित हो सकती है। इससे हजारों किसानों की फसल दांव पर लगने की आशंका है।
1936 में हुआ था बांध का निर्माण
सरोधा बांध का निर्माण वर्ष 1936 में हुआ था। 30.15 एमसीएम जल क्षमता वाले इस बांध की कुल सिंचाई क्षमता 10,200 हेक्टेयर है। वर्तमान में लगभग 7,355 हेक्टेयर क्षेत्र सीधे तौर पर इससे लाभान्वित हो रहा है। गर्मी के मौसम में 16 गांवों को निस्तारी के लिए भी इसी बांध से पानी उपलब्ध कराया जाता है।
मुख्य नहर की लंबाई 39 किलोमीटर और सहायक नहरों की कुल लंबाई 83 किलोमीटर है। कुल 9,348 किसान इस सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर हैं। ऐसे में नहर की दीवारों में आई दरारें केवल संरचनात्मक क्षति नहीं, बल्कि पूरे कृषि तंत्र के लिए खतरे का संकेत हैं।
किसानों में बढ़ी चिंता
ग्राम तारो, भागूटोला और आसपास के किसानों का कहना है कि यदि नहर क्षतिग्रस्त होती है तो खरीफ सीजन में धान की बुआई प्रभावित होगी। किसान संदीप देवांगन ने बताया कि पिछले वर्ष समय पर पानी मिलने से अच्छी फसल हुई थी, लेकिन इस बार नहर ही सुरक्षित नहीं रही तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
ग्रामीणों ने थाना, खनिज विभाग और जिला प्रशासन में लिखित शिकायत दी है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि खनन माफिया प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठा रहे हैं।
प्रतिबंध के बावजूद जारी है परिवहन
ग्रामीणों के अनुसार मुरुम खनन स्थल से ट्रकों को निकालने के लिए नहर पार मार्ग का उपयोग किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नहर की संरचना जल प्रवाह के अनुरूप बनाई जाती है, न कि 20 से 30 टन वजनी ट्रकों का भार सहने के लिए। लगातार भारी वाहनों के गुजरने से मिट्टी और कंक्रीट पर दबाव बढ़ा है, जिससे दरारें चौड़ी हो सकती हैं।
यदि रिसाव बढ़ा या बरसात के दौरान कटाव हुआ तो नहर टूटने की आशंका भी बन सकती है।
प्रशासन ने कही कार्रवाई की बात
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता मनोज पराते ने बताया कि नहर पार में भारी वाहनों का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित है। पूर्व में लोहे के एंगल लगाकर मार्ग को रोका गया था, लेकिन उन्हें भी तोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई खनिज विभाग के अधिकार क्षेत्र में आती है।
जिला खनिज अधिकारी ने भी अवैध मुरुम खनन स्थल पर टीम भेजकर कार्रवाई करने की बात कही है।
फिलहाल, किसानों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाला खरीफ सीजन हजारों परिवारों के लिए संकट लेकर आ सकता